
सेहत से खेलता है कंप्यूटर
यदि कंप्यूटर के आगे कायदे से नहीं बैठेंगे, यह चिंता नहीं करेंगे कि कंप्यूटर कहाँऔर कैसे रखा जाय, स्क्रीन और आँखों के बीच किस प्रकार तालमेल हो तो गर्दनऔर पीठ में दर्द , हाथों और अँगुलियों और कलाई में दर्द, सिर में भारीपन औरआँखों पर असर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा |
आजकल करीब-करीब हर व्यक्ति कंप्यूटर उपयोग कर रहा है| चाहे काम छोटा हो या बड़ा , घर हो या दफ्तर हर जगह कंप्यूटर का उपयोग होता है | बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े सभी डेस्कटॉप के सामने बैठते हैं | बस, फर्क इतना है की कोई थोड़ी देर कंप्यूटर पर बैठता है तो किसी को घंटो रोजाना इस पर काम करना पड़ता है| इसलिए इतना तो तय है कि कंप्यूटर का आपके स्वाथ्य के साथ कहीं न कहीं गहरा रिश्ता जरुर होगा | कंप्यूटर ने जहाँ हमारे कार्यों को काफी आसान बना दिया है और दक्षता बढ़ा दी है वहीं हमारे शरीर पर एक प्रतिकूल असर भी छोड़ा है | कईयों को यह थोड़े समय के बाद साफ नजर भी आने लगता है | जैसे आँखों पर असर, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत रहना, हाथों और उँगलियों और कलाई में दर्द सिर में भारीपन और दर्द की समस्या आदि ये सब कंप्यूटर की देन है | लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कंप्यूटर पर काम करना छोड़ दें|
दरअसल ये सब समस्याएँ किन्ही कारणों से ही होती है और ये वे कारण होते है जिन्हें हम एक कंप्यूटर उपयोगक्ता के रूप में नजरअंदाज करते चलते हैं | जैसे कंप्यूटर कहाँ और कैसे रखा हो, स्क्रीन और आँखों के बीच तालमेल किस प्रकार रखा जाय जिससे कि आँखों और गर्दन पर असर न पड़े, कीबोर्ड की पोजीशन कैसे हो
नी चाहिए ताकि टाइप करते समय कलाई और उँगलियों में खिचाव नहीं आये|
यह एक तथ्य है कि 98 फीसदी लोग जन्म के समय आँखों से बिलकुल स्वस्थ होते है आप पाएंगे कि आँखों की मांसपेशियाँ सर्वाधिक आरामदायक स्थिति में उस समय होती है जब हम किसी दूर की वस्तु या आकाश की ओर देखते है इसी तरह इंसान का शरीर गतिशील के लिए बना है लेकिन जब हम लम्बे समय तक एक ही स्थिति या मुद्रा में बैठ रहें तो यह कष्टदायक हो सकता है ठीक यही बात कंप्यूटर पर काम करने वालों के साथ है| अगर आप बिना किसी आराम के लम्बे समय तक रोज स्क्रीन के सामने बैठते है तो यह आपके लिए कई तरह की बिमारियों को जन्म दे सकता है और थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर रूप धारण कर सकती है यह जो स्थिति होती है इसे कंप्यूटर फिटिंग सिंड्राम (सीपीएस) यानी कंप्यूटर से होने वाली थकान का लक्षण कहा जाता है | कंप्यूटर पर काम करने के दौरान आँखों के मांसपेशियों में जो खिचाव और दर्द होता है उसे कंप्यूटर विजन सिंड्राम कहा जाता है कंप्यूटर उपयोगक्ताओं को सबसे ज्यादा समस्या इसी की होती है | एक अध्ययन के मुताबिक करीब सात करोड़ लोग ऐसे है और इसमे से 90 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में सीवीएस से पीड़ित है | सीवीएस के जो प्रमुख लक्षण है उनमें आँखों में थकान सिरदर्द, धुंधलापन आना , आँखों में जलन, गर्दन और कंधे में दर्द जैसी शिकायत है होता यह है कि जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलक झपकने की दर कम हो जाती है और निगाहें सीधी स्क्रीन पर ही लगी रहती है यही वजह पहला कारण बनता है जिसमे आँखों में सूखेपन की शिकायत शुरू होती है फिर अगर आप इस पर गौर नहीं करते है और लम्बे समय तक कंप्यूटर पर बैठने का सिलसिला जारी रहता है तो सीधा असर साइट पर पड़ता है इसमे निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष दृष्टिवैषम्य आई फोकस का गड़बड़ा जाना जैसी बीमारियाँ हो जाती है |
कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते समय आँखों में जो समस्याएँ पैदा होती है | उनका एक कारण पलकों का कम झपकना भी है जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलकों का झपकते रहना बहुत जरुरी होता है पलक के झपकने से आँखों की सतह पर सूखापन नहीं आता है जब लोग कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो सामान्य से पांच गुना कम पलक नहीं झपकते है जब आप बहुत देर तक पलक नहीं झपकते है तो आंसू जल्दी सुख जाते है और इसी से आँखों में सूखापन आ जाता है आमतौर पर दफ्तर में जो कमरे होते है उनमे सुखा वातावरण होता है उससे भी आँख में सूखापन और बड़ता है जब हम पड़ते है या सामान्य रूप से कोई काम करते है तो किताब मैगजीन आदी को अक्सर आपनी गोद में ही रखते है हमारी आँखों का ज्यादातर हिस्सा तो पलकों से ही ढका रहता है इसलिए आंसू जल्दी से सुखाते नहीं है कंप्यूटर पर देखने का मतलब होता है स्क्रीन पर लगातार और सीधे देखना आँखों की सतह जितनी ज्यादा एक्सपोज होती है आंसूं उतनी ही तेजी से सुखाते है और फिर इसी से आँखों में जलन सूखेपन खिचाव जैसी शिकायत होती है |
सबसे पहले बात करें कुर्सी की, जिस पर आप बैठ कर काम करते है उस कुर्सी की ऊंचाई इस प्रकार एडजस्ट की जानी चाहिए ताकि पैर सीधे जमीन पर टिक सके और गुतनों का कुलाहों से झुकाव बहुत ही मामूली हो अगर पैर जमीन पर नहीं टिकेंगे तो लटके लटके दर्द होने लगेगा कुर्सी पर पीछे की ओर कमर को पूरा टीकाएँ और कंधे कुर्सी के बैकरेस्ट से पुरी तरह मिलने चाहिए कुर्सी पर इस प्रकार बैठना चाहिए की अपर बैक और लोअरबैक का झुकाव कोण 90 से 115 डिग्री के बीच ही हो यदि जरुरी हो तो छोटा तकिया इस्तेमाल कर सकते है अगर कुर्सी आगे पीछे हो सकती है तो थोड़ी थोड़ी देर में स्थिति बदलते रहना चाहिए कुर्सी ऐसी हो जिसमे जरुरत पड़ने पर हत्थों को हटाया जा सके इससे आप हत्थों के बीच भी समायोजन कर सकते हैं |
आजकल जो कंप्यूटर फर्नीचर बनाये जा रहे है वे आपकी जरुरत के आलावा स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखकर बनाये जा रहे है कंप्यूटर टेबल से भी समस्याएँ पैदा होती है समस्याओं की तह में जाने से पहले आप खुद से कुछ सवाल पूछें जैसे आपका कंप्यूटर कितना ऊँचा है इसे देखने के लिए आपको निगाहें ऊपर करनी पड़ती है या मानिटर की सीध में आँख रखते है कुछ आपको सलाह देगें की मानिटर हल्का सा नीचे होना चाहिए लेकिन सच यह है की मानिटर को आप कैसे भी रखें इसका कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, पर उसे देखने में कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए आमतौर पर मानिटर भुजाओं की सीध में होना चाहिए |
बाजार में आपको कुछ टेबल ऐसी मिल जायेंगी जिनमें मानिटर जरा सा नीचे की और आता है इससे आपको यह लगने लगेगा की मानिटर उठ कर आपकी गोद में आ गया है | मानिटर को इस प्रकार रखा जाना चाहिए की यह आपके सीधा सामने पड़े | यह कीबोअर्द से ऊपर सीधे हाथ की ओर होना चाहिए ताकि गर्दन आरामदायक स्थिति में रहे | मानिटर का ऊपरी हिस्सा आँखों के लेबल से ज्यादा से ज्यादा दो इंच ही ऊपर हो | अगर कमरे में आसपास कोई खिड़की हो तो यह हमेशा ध्यान रखें की खेडकी ओर मानिटर के बिच 90 degree का कोण हो वरना खिड़की से रोशनी का छिलका मानिटर पर पड़ेगा |
काम करते समय फोन को मानिटर के आसपास उस जगह पर रखें जहाँ आपका हाथ आसानी से पहुँच सके ओर उसे उठाने के लिए आपको ज्यादा हिलना डुलना नहीं पड़े | जिस हाथ का उपयोग कम करते हों उस ओर फोन रखा जाना चाहिए | अगर आप हेंडसेट या स्पीकर फोन का उपयोग करें तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकिं इसमे गर्दन को हिलना भी नहीं पड़ेगा |

जब भी आप कोई कंप्यूटर टेबल खरीदें तो इतना जरुर ध्यान रखें की मानिटर रखने के आलावा उसमे सीडी , फ्लापी, कंप्यूटर स्टेशनरी आदि आसानी से राखी जा सके | मानिटर रकने के बाद बरी आती है कीबोर्ड रखने का बंदोबस्त क्या होगा | समस्या यह है की आजकल ज्यादातर निर्माता माल बचने के चक्कर में छोटी कीबोर्ड ट्रे बना देते है ओर ये ट्रे कीबोर्ड के लम्बाई से ज्यादा बड़ी नहीं होती | इससे सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है की माउस को अलग और ऊंचाई पर रकना पड़ता है ऐसे में लोग माउस को मानिटर के पास रख लेते है और फिर उस तक पहुँचाने के लिए उन्हें एक हाथ को बार बार आगे लाना पड़ता है | अगर माउस और कीबोर्ड एक लेबल में नहीं होंगे तो आपके लिए ही समस्या पैदा होगी | आप जिस हाथ से भी माउस का इस्तेमाल करते हों उसी हाथ की तरफ कीबोर्ड के आगे उसे रखें | माउस और कीबोर्ड की इस तरह की व्यवस्था से आप कंधे के दर्द के शिकार होने से बच जायेंगे |
अब बात आती है की टेबल की ऊंचाई क्या हो ? टेबल कंप्यूटर फर्नीचर का एक महातोपूर्ण हिस्सा होता है और इसकी ऊंचाई कुर्सी के ऊंचाई के अनुपात में होने चाहिए | इसलिए या हमेशा सुनिश्चित करें की जब भी आप कुर्सी पर बैठे तो मानिटर पर शीर्ष हिस्सा आपकी आँख के एकदम शिध में या उससे नीचे रहे ऐसा न हो की मानिटर देखने के लिए आपको सिर उठाकर आंखे ऊपर करनी पड़ रही है जब आपका हाथ कीबोर्ड पर पड़े तो कोहनी ९० डिग्री का कोण बनाये |
कंप्यूटर पर काम करते समय थकान नहीं हो इसके लिए जरुरी है कि २० मिनट काम करने के बाद एक दो मिनट का आराम ले लें | दफ्तर में खाली समय में कभी भी कंप्यूटर के सामने न बैठे | इससे अनावश्यक रूप से कंप्यूटर के सामने बैठने की आदत पड़ जाती है | लगातार कंप्यूटर की तरफ कभी नहीं देखना चाहिए काम के बीच बीच में आसपास निगाहें डालते रहना चाहिए | इससे आँख में जल्दी से थकन महसूस नहीं होगी और आँखों की दूसरी समस्याओं से भी आप काफी हद तक बच सकगें अगर आप अपने आँखों के डॉक्टर को दिखने जाते है तो उसे यह साफ-साफ बताएं के आप कंप्यूटर पर कितने घंटे लगातार बैठ रहे है |
कंप्यूटर फर्नीचर बनाने वाली कंपनी अपना उत्पाद तैयार काने के लिए पहले आजकल काफी शोध करती है उसके बाद ही बे निर्माण का काम शुरू करती है इसमे ये कंपनी कई तरह के सर्वे करती है और फिर उसी से नतीजा निकलती है की बाजार में किस तरह की मांग है और किस तरह के आरामदायक फर्नीचर की लोगों को जरुरत है इसमे स्वास्थ्य के पहलू का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है कंप्यूटर टेबल और कुर्शी को एस प्रकार से डिज़ाइन किया जाता है कि व्यक्ति उसे आपनी जरुरत के हिसाब से एडजस्ट कर सके| कंपनी के ये हाइट एडजस्टेबल वर्क सेंटर इस अवधारणा पर आधारित है कि कंप्यूटर उपयोगकता को अपना स्वाथ्य बनाये रखने के लिए यह जरुरी है की वह स्थितियों में जल्दी-जल्दी परिवर्तन करता रहे है |
यदि कंप्यूटर के आगे कायदे से नहीं बैठेंगे, यह चिंता नहीं करेंगे कि कंप्यूटर कहाँऔर कैसे रखा जाय, स्क्रीन और आँखों के बीच किस प्रकार तालमेल हो तो गर्दनऔर पीठ में दर्द , हाथों और अँगुलियों और कलाई में दर्द, सिर में भारीपन औरआँखों पर असर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा |
आजकल करीब-करीब हर व्यक्ति कंप्यूटर उपयोग कर रहा है| चाहे काम छोटा हो या बड़ा , घर हो या दफ्तर हर जगह कंप्यूटर का उपयोग होता है | बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े सभी डेस्कटॉप के सामने बैठते हैं | बस, फर्क इतना है की कोई थोड़ी देर कंप्यूटर पर बैठता है तो किसी को घंटो रोजाना इस पर काम करना पड़ता है| इसलिए इतना तो तय है कि कंप्यूटर का आपके स्वाथ्य के साथ कहीं न कहीं गहरा रिश्ता जरुर होगा | कंप्यूटर ने जहाँ हमारे कार्यों को काफी आसान बना दिया है और दक्षता बढ़ा दी है वहीं हमारे शरीर पर एक प्रतिकूल असर भी छोड़ा है | कईयों को यह थोड़े समय के बाद साफ नजर भी आने लगता है | जैसे आँखों पर असर, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत रहना, हाथों और उँगलियों और कलाई में दर्द सिर में भारीपन और दर्द की समस्या आदि ये सब कंप्यूटर की देन है | लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कंप्यूटर पर काम करना छोड़ दें|
दरअसल ये सब समस्याएँ किन्ही कारणों से ही होती है और ये वे कारण होते है जिन्हें हम एक कंप्यूटर उपयोगक्ता के रूप में नजरअंदाज करते चलते हैं | जैसे कंप्यूटर कहाँ और कैसे रखा हो, स्क्रीन और आँखों के बीच तालमेल किस प्रकार रखा जाय जिससे कि आँखों और गर्दन पर असर न पड़े, कीबोर्ड की पोजीशन कैसे हो
नी चाहिए ताकि टाइप करते समय कलाई और उँगलियों में खिचाव नहीं आये|यह एक तथ्य है कि 98 फीसदी लोग जन्म के समय आँखों से बिलकुल स्वस्थ होते है आप पाएंगे कि आँखों की मांसपेशियाँ सर्वाधिक आरामदायक स्थिति में उस समय होती है जब हम किसी दूर की वस्तु या आकाश की ओर देखते है इसी तरह इंसान का शरीर गतिशील के लिए बना है लेकिन जब हम लम्बे समय तक एक ही स्थिति या मुद्रा में बैठ रहें तो यह कष्टदायक हो सकता है ठीक यही बात कंप्यूटर पर काम करने वालों के साथ है| अगर आप बिना किसी आराम के लम्बे समय तक रोज स्क्रीन के सामने बैठते है तो यह आपके लिए कई तरह की बिमारियों को जन्म दे सकता है और थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर रूप धारण कर सकती है यह जो स्थिति होती है इसे कंप्यूटर फिटिंग सिंड्राम (सीपीएस) यानी कंप्यूटर से होने वाली थकान का लक्षण कहा जाता है | कंप्यूटर पर काम करने के दौरान आँखों के मांसपेशियों में जो खिचाव और दर्द होता है उसे कंप्यूटर विजन सिंड्राम कहा जाता है कंप्यूटर उपयोगक्ताओं को सबसे ज्यादा समस्या इसी की होती है | एक अध्ययन के मुताबिक करीब सात करोड़ लोग ऐसे है और इसमे से 90 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में सीवीएस से पीड़ित है | सीवीएस के जो प्रमुख लक्षण है उनमें आँखों में थकान सिरदर्द, धुंधलापन आना , आँखों में जलन, गर्दन और कंधे में दर्द जैसी शिकायत है होता यह है कि जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलक झपकने की दर कम हो जाती है और निगाहें सीधी स्क्रीन पर ही लगी रहती है यही वजह पहला कारण बनता है जिसमे आँखों में सूखेपन की शिकायत शुरू होती है फिर अगर आप इस पर गौर नहीं करते है और लम्बे समय तक कंप्यूटर पर बैठने का सिलसिला जारी रहता है तो सीधा असर साइट पर पड़ता है इसमे निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष दृष्टिवैषम्य आई फोकस का गड़बड़ा जाना जैसी बीमारियाँ हो जाती है |
कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते समय आँखों में जो समस्याएँ पैदा होती है | उनका एक कारण पलकों का कम झपकना भी है जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलकों का झपकते रहना बहुत जरुरी होता है पलक के झपकने से आँखों की सतह पर सूखापन नहीं आता है जब लोग कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो सामान्य से पांच गुना कम पलक नहीं झपकते है जब आप बहुत देर तक पलक नहीं झपकते है तो आंसू जल्दी सुख जाते है और इसी से आँखों में सूखापन आ जाता है आमतौर पर दफ्तर में जो कमरे होते है उनमे सुखा वातावरण होता है उससे भी आँख में सूखापन और बड़ता है जब हम पड़ते है या सामान्य रूप से कोई काम करते है तो किताब मैगजीन आदी को अक्सर आपनी गोद में ही रखते है हमारी आँखों का ज्यादातर हिस्सा तो पलकों से ही ढका रहता है इसलिए आंसू जल्दी से सुखाते नहीं है कंप्यूटर पर देखने का मतलब होता है स्क्रीन पर लगातार और सीधे देखना आँखों की सतह जितनी ज्यादा एक्सपोज होती है आंसूं उतनी ही तेजी से सुखाते है और फिर इसी से आँखों में जलन सूखेपन खिचाव जैसी शिकायत होती है |
सबसे पहले बात करें कुर्सी की, जिस पर आप बैठ कर काम करते है उस कुर्सी की ऊंचाई इस प्रकार एडजस्ट की जानी चाहिए ताकि पैर सीधे जमीन पर टिक सके और गुतनों का कुलाहों से झुकाव बहुत ही मामूली हो अगर पैर जमीन पर नहीं टिकेंगे तो लटके लटके दर्द होने लगेगा कुर्सी पर पीछे की ओर कमर को पूरा टीकाएँ और कंधे कुर्सी के बैकरेस्ट से पुरी तरह मिलने चाहिए कुर्सी पर इस प्रकार बैठना चाहिए की अपर बैक और लोअरबैक का झुकाव कोण 90 से 115 डिग्री के बीच ही हो यदि जरुरी हो तो छोटा तकिया इस्तेमाल कर सकते है अगर कुर्सी आगे पीछे हो सकती है तो थोड़ी थोड़ी देर में स्थिति बदलते रहना चाहिए कुर्सी ऐसी हो जिसमे जरुरत पड़ने पर हत्थों को हटाया जा सके इससे आप हत्थों के बीच भी समायोजन कर सकते हैं |
आजकल जो कंप्यूटर फर्नीचर बनाये जा रहे है वे आपकी जरुरत के आलावा स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखकर बनाये जा रहे है कंप्यूटर टेबल से भी समस्याएँ पैदा होती है समस्याओं की तह में जाने से पहले आप खुद से कुछ सवाल पूछें जैसे आपका कंप्यूटर कितना ऊँचा है इसे देखने के लिए आपको निगाहें ऊपर करनी पड़ती है या मानिटर की सीध में आँख रखते है कुछ आपको सलाह देगें की मानिटर हल्का सा नीचे होना चाहिए लेकिन सच यह है की मानिटर को आप कैसे भी रखें इसका कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, पर उसे देखने में कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए आमतौर पर मानिटर भुजाओं की सीध में होना चाहिए |
बाजार में आपको कुछ टेबल ऐसी मिल जायेंगी जिनमें मानिटर जरा सा नीचे की और आता है इससे आपको यह लगने लगेगा की मानिटर उठ कर आपकी गोद में आ गया है | मानिटर को इस प्रकार रखा जाना चाहिए की यह आपके सीधा सामने पड़े | यह कीबोअर्द से ऊपर सीधे हाथ की ओर होना चाहिए ताकि गर्दन आरामदायक स्थिति में रहे | मानिटर का ऊपरी हिस्सा आँखों के लेबल से ज्यादा से ज्यादा दो इंच ही ऊपर हो | अगर कमरे में आसपास कोई खिड़की हो तो यह हमेशा ध्यान रखें की खेडकी ओर मानिटर के बिच 90 degree का कोण हो वरना खिड़की से रोशनी का छिलका मानिटर पर पड़ेगा |
काम करते समय फोन को मानिटर के आसपास उस जगह पर रखें जहाँ आपका हाथ आसानी से पहुँच सके ओर उसे उठाने के लिए आपको ज्यादा हिलना डुलना नहीं पड़े | जिस हाथ का उपयोग कम करते हों उस ओर फोन रखा जाना चाहिए | अगर आप हेंडसेट या स्पीकर फोन का उपयोग करें तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकिं इसमे गर्दन को हिलना भी नहीं पड़ेगा |

जब भी आप कोई कंप्यूटर टेबल खरीदें तो इतना जरुर ध्यान रखें की मानिटर रखने के आलावा उसमे सीडी , फ्लापी, कंप्यूटर स्टेशनरी आदि आसानी से राखी जा सके | मानिटर रकने के बाद बरी आती है कीबोर्ड रखने का बंदोबस्त क्या होगा | समस्या यह है की आजकल ज्यादातर निर्माता माल बचने के चक्कर में छोटी कीबोर्ड ट्रे बना देते है ओर ये ट्रे कीबोर्ड के लम्बाई से ज्यादा बड़ी नहीं होती | इससे सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है की माउस को अलग और ऊंचाई पर रकना पड़ता है ऐसे में लोग माउस को मानिटर के पास रख लेते है और फिर उस तक पहुँचाने के लिए उन्हें एक हाथ को बार बार आगे लाना पड़ता है | अगर माउस और कीबोर्ड एक लेबल में नहीं होंगे तो आपके लिए ही समस्या पैदा होगी | आप जिस हाथ से भी माउस का इस्तेमाल करते हों उसी हाथ की तरफ कीबोर्ड के आगे उसे रखें | माउस और कीबोर्ड की इस तरह की व्यवस्था से आप कंधे के दर्द के शिकार होने से बच जायेंगे |
अब बात आती है की टेबल की ऊंचाई क्या हो ? टेबल कंप्यूटर फर्नीचर का एक महातोपूर्ण हिस्सा होता है और इसकी ऊंचाई कुर्सी के ऊंचाई के अनुपात में होने चाहिए | इसलिए या हमेशा सुनिश्चित करें की जब भी आप कुर्सी पर बैठे तो मानिटर पर शीर्ष हिस्सा आपकी आँख के एकदम शिध में या उससे नीचे रहे ऐसा न हो की मानिटर देखने के लिए आपको सिर उठाकर आंखे ऊपर करनी पड़ रही है जब आपका हाथ कीबोर्ड पर पड़े तो कोहनी ९० डिग्री का कोण बनाये |
कंप्यूटर से होने वाली थकन से बचने का एक तरीका यह है कि आप उपयुक्त हार्डवेयरों का उपयोग करें | आजकल बाजार में तरह तरह के माउस मिल रहे हें बहुत छोटे भी और बहुत बड़े भी | ज्यादातर माउस अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ही बने होते है |
कंप्यूटर पर काम करते समय थकान नहीं हो इसके लिए जरुरी है कि २० मिनट काम करने के बाद एक दो मिनट का आराम ले लें | दफ्तर में खाली समय में कभी भी कंप्यूटर के सामने न बैठे | इससे अनावश्यक रूप से कंप्यूटर के सामने बैठने की आदत पड़ जाती है | लगातार कंप्यूटर की तरफ कभी नहीं देखना चाहिए काम के बीच बीच में आसपास निगाहें डालते रहना चाहिए | इससे आँख में जल्दी से थकन महसूस नहीं होगी और आँखों की दूसरी समस्याओं से भी आप काफी हद तक बच सकगें अगर आप अपने आँखों के डॉक्टर को दिखने जाते है तो उसे यह साफ-साफ बताएं के आप कंप्यूटर पर कितने घंटे लगातार बैठ रहे है |
कंप्यूटर फर्नीचर बनाने वाली कंपनी अपना उत्पाद तैयार काने के लिए पहले आजकल काफी शोध करती है उसके बाद ही बे निर्माण का काम शुरू करती है इसमे ये कंपनी कई तरह के सर्वे करती है और फिर उसी से नतीजा निकलती है की बाजार में किस तरह की मांग है और किस तरह के आरामदायक फर्नीचर की लोगों को जरुरत है इसमे स्वास्थ्य के पहलू का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है कंप्यूटर टेबल और कुर्शी को एस प्रकार से डिज़ाइन किया जाता है कि व्यक्ति उसे आपनी जरुरत के हिसाब से एडजस्ट कर सके| कंपनी के ये हाइट एडजस्टेबल वर्क सेंटर इस अवधारणा पर आधारित है कि कंप्यूटर उपयोगकता को अपना स्वाथ्य बनाये रखने के लिए यह जरुरी है की वह स्थितियों में जल्दी-जल्दी परिवर्तन करता रहे है |
ज्यादातर कोम्पन्यों के आपने सेल्स विभाग होते है जो ग्राहकों के सीधे संपर्क में रहते है और उनकी जरुरत के बने में पूछते हुए अपने उत्पादों का सर्वे भी करते है | कुछ कोम्पन्यों ने इस काम के लिए कॉल सेंटरों की सेवाएं ले राखी है | भारत की प्रमुख फर्नीचर निर्माता कंपनी गोदरेज देश की पहली इसी कम्पनी है जिसने फर्नीचर तैयार करने के पहले स्वाथ्य संबंधी पहलुओं पर भी काफी शोध कराया है और ग्राहकों को एकदम आरामदायक फर्नीचर मुहैया करने की कोशिश की है |
मामला सिर्फ फर्नीचर तक ही सीमित नहीं है | हार्डवेयर निर्माता कंपनी भी इस बात पर काफी जोर दे रही है | की इसे उत्पाद बनाये जाएँ जो स्वास्थ्य की दृष्टी से पुरी तरह अनुकूल हों | माइक्रोसाफ्ट लाजितैक और सैमसंग ने इस दिशा में कदम उठाया है और इसे कीबोर्ड तैयार किये है | इसमे इस बात का खासतौर से ध्यान रखा गया है की उपयोक्ता इन पर काम के बाद अपने को थका हुआ महसूस नहीं कर, क्योंकि ज्यादातर शिकायतें यही सामने आती है कि कीबोर्ड पर थोड़ी देर काम करने के बाद कलाई और उँगलियों में थकन होने लगती है | इसलिए अब कंपनी कीबोर्ड को इस प्रकार डिज़ाइन कर रही है कि उन पर टाइपिंग कम थकने वाली हो, कुंजियाँ बहुत ही हल्की हो ताकि उँगलियों पर जोर नहीं पड़े | आजकल बाजार में इसे कीबोर्ड देखने को मिल रहे है जिन्हें झुकव्युक्त और एक ही बोर्ड पर कुंजियों के अलग-अलग खंड बने गए है ये हाथ कलाई और भुजाओं को ज्यादा आराम देने को ध्यान में रखकर तैयार किये गए है | माउस भी इसी तरह डिज़ाइन किये जा रहे है आजकल बाजार में आप्टिकल माउस के आलावा लेसर माउस और वायरलेस माउस भी मिल रहे है |
इस नए तरह के फर्नीचर बाजार में कंपनियों के लिए दाम एक बड़ी समस्या है क्योंकि इस तरह के फर्नीचर में छिपी हुयी लगत ज्यादा होती है |
इसा इसलिए होता है कि जो उत्पाद तैयार किया जाता है उसके बनाने में आपके स्वाथ्य संबंधी पक्ष पर भी काफी खर्च आता है यही कारण है कि इन फर्नीचरों के दाम आम फर्नीचरों से अलग होते है |
मामला सिर्फ फर्नीचर तक ही सीमित नहीं है | हार्डवेयर निर्माता कंपनी भी इस बात पर काफी जोर दे रही है | की इसे उत्पाद बनाये जाएँ जो स्वास्थ्य की दृष्टी से पुरी तरह अनुकूल हों | माइक्रोसाफ्ट लाजितैक और सैमसंग ने इस दिशा में कदम उठाया है और इसे कीबोर्ड तैयार किये है | इसमे इस बात का खासतौर से ध्यान रखा गया है की उपयोक्ता इन पर काम के बाद अपने को थका हुआ महसूस नहीं कर, क्योंकि ज्यादातर शिकायतें यही सामने आती है कि कीबोर्ड पर थोड़ी देर काम करने के बाद कलाई और उँगलियों में थकन होने लगती है | इसलिए अब कंपनी कीबोर्ड को इस प्रकार डिज़ाइन कर रही है कि उन पर टाइपिंग कम थकने वाली हो, कुंजियाँ बहुत ही हल्की हो ताकि उँगलियों पर जोर नहीं पड़े | आजकल बाजार में इसे कीबोर्ड देखने को मिल रहे है जिन्हें झुकव्युक्त और एक ही बोर्ड पर कुंजियों के अलग-अलग खंड बने गए है ये हाथ कलाई और भुजाओं को ज्यादा आराम देने को ध्यान में रखकर तैयार किये गए है | माउस भी इसी तरह डिज़ाइन किये जा रहे है आजकल बाजार में आप्टिकल माउस के आलावा लेसर माउस और वायरलेस माउस भी मिल रहे है |
इस नए तरह के फर्नीचर बाजार में कंपनियों के लिए दाम एक बड़ी समस्या है क्योंकि इस तरह के फर्नीचर में छिपी हुयी लगत ज्यादा होती है |
इसा इसलिए होता है कि जो उत्पाद तैयार किया जाता है उसके बनाने में आपके स्वाथ्य संबंधी पक्ष पर भी काफी खर्च आता है यही कारण है कि इन फर्नीचरों के दाम आम फर्नीचरों से अलग होते है |
- BHUPENDRA DEWANGAN
- bhupendradewangan06@gmail.com
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