Monday, August 16, 2010

कौन सा है बेहतर ब्राउजर


वेब ब्राउजर का आकलन करने के लिए कुछ खास मानकों पर ध्यान देने की जरुरत है ये मानक है ब्राउजर का स्टार्ट अप टाइम सीएसएस या जावा स्क्रिप्ट की लोडिंग स्पीड कंटेंट के लिहाज से ज्यादा हेवी सीटों को संभालने की क्षमता आदि

कुछ समय पहले तक वेब की दुनिया में घुसाने का एक ही रास्ता होता था और वह रास्ता था इन्टरनेट एक्स्प्लोरर का इसके अलावा कोई और ब्राउजर नहीं था बाद में जब कुछ नेइ इन्टरनेट ब्राउजर आये तब भी बाज़ार पर इन्टरनेट एक्स्प्लोरर का दबदबा बना रहा अब उसके एकक्षत्र राज के आगे ढेर सारी चुनोतियाँ गई है आज बाजार में कम से कम अध दर्जन वेब ब्राउजर है जिनके संतुष्ट उपयोक्तायों की कमी नहीं है आज उपयोग में लाये जा रहे ब्राउजर में इन्टरनेट एक्स्प्लोरर, के अलावा फायरफोक्स , सफारी, ओपेरा, क्रोम आदी का नाम लिया जा सकता है आइये हम यह जानने की कोशिश करते है इन पांच में से कौन सा ब्राउजर सबसे अच्छा है और आप किसकी मदद से सबसे अच्छे ढंग से इन्टरनेट की दुनिया एक्सप्लोर कर सकते है वेब ब्राउजर का आकलन करने के लिए कुछ खास मानकों पर ध्यान देने की जरुरत है ये मानक है , ब्राउजर का स्टार्ट अप टाइम सीएसएस या जावा स्क्रिप्ट की लोडिंग स्पीड कंटेंट के लिहाज से ज्यादा हेव़ी साइटों को सँभालने की क्षमता आदि किसी भी ब्राउजर को सिस्टम में डाऊनलोड करने से पहले इन सबके बारे में जानना जरुरी है इस लिहाज से फायरफोक्स का प्रदर्शन बाकी ब्राउजर के मुकाबले बेहतर है

इंटरनेट एक्स्प्लोरर के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेश की थी मोज़िला फायरफोक्स ने जिस दिन इसे लांच किया किया गया उस दिन इस पर 80 लाख डाऊनलोड हुए थे और यह गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया गया हलाकि इस रिकार्ड इसकी गुणवत्ता मापने का पैमाना नहीं है लेकिन इसने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधर किया है और उपयोगक्ताओं की जरुरत के मुताबीक खुद को ढला है अगर सिर्फ ब्राउजर के स्टार्ट अप टाइम को छोड़ दें तो बाकी हर पैमाने पर फायरफोक्स किसी भी दुसरे ब्राउजर के मुकाबले बेह्तर है पर स्टार्ट अप टाइम के मामले में इसका रिकार्ड काफी ख़राब है यह खामी इसके लांच होने के दिन से ही है लुक और फील के मामले में फायरफोक्स का जवाब नहीं है इसकेसबसे ताजा संस्करण फायरफोक्स ३ का लुक और भी साधा व साफ़ सुथरा है





ब्राउजर के तमाम जरुरीबटन जैसे होम , स्टॉप, और रिफ्रेश बटन काफी प्रमुखता के साथ किखाये गए है इसके अलावा जहाँ तकइसके फीचर्स की बात है तो इसकी कई खूबियाँ इसे दुसरे ब्राउजर से अलग करती है
बुकमार्क, हिस्ट्री , मैनेजमेंट, सर्च इंजन इंट्रीग्रेशन टैब्स ब्राउजिंग आदि कुछ इसे क्षेत्र है, जिसमेफायरफोक्स का प्रदर्शन बेहद शानदार है स्टार्ट अप टाइम के मुकाबले में यह बाकी चरों ब्राउजर से पीछेहै नया विंडो खोलने में भी इसके अपेक्षाकृत ज्यादा समय लगता है इसके अलावा पेज खुल जाने केबाद बी इसमे एक किस्म का भारीपन लगता है , जिससे वेब ब्राउजिंग का अनुभव अच्चा नहीं रह जाताहै जावा स्क्रिप्ट और सीएसएस की लोडिंग टाइम में इसकी रफ़्तार बाकी चार ब्राउजरों के मुकाबले बेहतर है सुरक्षा के लिहाज से भी यह काफी अच्छा ब्राउजर है

फ़ायरफ़ॉक्स की चुनौती से मुक़ाबले के लिए इन्टरनेट एक्सप्लोरर ने काफी प्रयास किये है और अपनी गुणवत्ता में भी काफी सुधर किया है फिर भी यह आज की तारिख ने फ़ायरफ़ॉक्स से मुकाबला कर पानेमें क्षण नहीं है इसकी सबसे बड़ी खूबी है ब्राउजर स्टार्ट अप टाइम अगर इसका आकलन 10 अंको के पैमाने पर किया जय तो स्पीड के मामले में इस ब्राउजर को पुरे 10 अंक मिलेंगे बुकमार्क , हिस्ट्री मैनेजमेंट और सुरक्षा के मामले में भी इन्टरनेट एक्स्प्लोरर अपने प्रबल प्रतिद्वंदी से ज्यादा पीछे नहीं है लेकिन फ्लैश , सीएसएस और जावा स्क्रिप्ट की लोडिंग की स्पीड , पासवर्ड मैनेजमेंट प्लग इन सपोर्टआदि कुछ ऐसे क्षेत्र है, जिनमे फ़ायरफ़ॉक्स का प्रदर्शन एक्स्प्लोरर के मुकाबले काफीअच्छ है अभी इसका सबसे ताजा संस्करण आई -10 बाजार में है अगर लुक एंड फील की बात करें तो यह आइईई-7 से कुछ ज्यादा अलग नहीं ही देखने में इसका लुक भी काफी साफ सुथरा है, लेकिन यह बुनियादी रूप सेअमेरिका के उपयोक्ताओं के लिए है कुल मिला कर सबसे पुराना वेब ब्राउजर इन्टरनेट एक्सप्लोरर अपने प्रतिद्वंदी फ़ायरफ़ॉक्स के बाद दुसरे नम्बर पर रखा जा सकता है
वेब ब्राउजर में निसंदेह तीसरा स्थान ओपेरा 9.5 का है कई मामलों में यह नम्बर एक ब्राउजर फ़ायरफ़ॉक्स के मुकाबले का है हालाँकि कम्पनी ने इसका बहुत ज्यादा प्रचार नहीं किया है और यह बहुत लोकप्रिय ब्राउजर नहीं है जिसमे सरे टैब्स एड्रेसबार के ऊपर दिए होते है और दुसरे ब्राउजरों के मुकाबले अलग किस्म का अनुभव देते है इस अधर पर कहा जा सकता है की लुक एंड फील के मामले में यह दुसरे ब्राउजर से काफी अलग है फीचर के मुकाबले में भी फ़ायरफ़ॉक्स और इन्टरनेट एक्सप्लोरर के काफी करीब है लेकिन ब्राउजर स्टार्ट अप टाइम के मामले में यह भी फ़ायरफ़ॉक्स की ही तरह इन्टरनेट एक्सप्लोरर के मुकाबले काफी पीछे है
इसमे भी विंडो खुलने में सामान्य से कुछ अधिक समय लगता है फ्लैश , जावा स्क्रिप्ट और सीएसएस के लोडिंग के टाइम के मामले में भी यह
फ़ायरफ़ॉक्स और इन्टरनेट एक्सप्लोरर दोनों से पीछे है जहाँ तक सुरक्षा की बात है और पासवर्ड , मैनेजमेंट , हिस्ट्री, मैनेजमेंट आदि की बात है तो उसमे इसका मुकाबला किसी भी दुसरे ब्राउजर से किया जा सकता है

इन तीन ब्राउजरों के अलावा दो और वेब ब्राउजर है जो बाजार में मौजूद है और जिन्हें इस्तेमाल करने वालों की संख्या अच्छी खासी है इनमे से एक है गूगल क्रोम और दूसरा है एपल का सफारी 3.12 इन दो में से सफारी का प्रदर्शन औसत से भी नीचे का है लेकिन क्रोम की कुछ खूबियाँ इसी है जो उसे टॉप तीन ब्राउजरों की बराबरी का बना देती है क्रोम की सबसे बड़ी खूबी ब्राउजर स्टार्ट अप टाइम

इस मामले में इसकी रफ़्तार इन्टरनेट एक्स्प्लोरर के बराबर है यानी इसे भी 100 men से 100 अंक दिए जा सकते है इसकी दूसरी खूबी है जावा स्क्रिप्ट सीएसएस और फ्लैश की लोडिंग का समय इस मामले में यह हमारे आकलन के लिए चुन लिए गए पांच ब्राउजर से बेहतर है क्रोम लेकिन बाकी सारी चीजों मसलन बुकमार्क , हिस्ट्री, मैनेजमेंट , पासवर्ड, मैनेजमेंट सुरक्षा आदि है मामले में यह औसत से ज्यादा नहीं है इसलिए इसे चौथे स्थान पर रखा जा सकता है आकलन के लिए चुने गए पांच ब्राउजरों में से सबसे ख़राब प्रदर्शन सफारी 3.12 का है हालाँकि इसका ब्राउजर स्टार्ट अप टाइम फ़ायरफ़ॉक्स और ऑपेरा दोनों से बेहतरहै लेकिन सिर्फ इस अधर पर इसका आकलन नहीं किया जा सकता ही सुरक्षा से लेकर बुकमार्क, हिस्ट्री, मैनेजमेंट , आदि में इसका प्रदर्शन औसत से भी नीचे है



Sunday, August 15, 2010


पीसी की सेहत का रखें ख्याल


क्या आपका कंप्यूटर पूरी तरह से स्वथ्य है? या उसे भी कोई बीमारी लग गई है? कहीं आपका कंप्यूटर उम्र के साथ-साथ होने वाली बीमारियों का शिकार तो नहीं हो गया है ? ये सवाल सुन कर चौंकने के जरुरत नहीं है क्योंकि कंप्यूटर भी बिल्कुल आपके शरीर की तरह है और अगर आप इसका सम्पूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित करना चाहते है तो आपको इसे पूरी तरह से स्वथ्य रखना होगा अगर आप इसकी कायदे से देख-भाल नहीं करते हैं तो हो सकता है की एन जरूरत के समय आपका कंप्यूटर धोखा दे जाए वैसे हम आपको बता दें की कैसे पता चलेगा की आपका कंप्यूटर स्वथ्य है या नहीं आप उन दिनों को याद कीजिये, जब आपने कंप्यूटर ख़रीदा था तब आपका पीसी तुरंत चालु होता था बटन दबाते ही आपका जाना पहचाना विंडोज सामने दिखाई देने लगता था जब आप बंद चाहते थे तो उसमें भी समय नहीं लगता था लेकिन अगर आपका कंप्यूटर चालू होने या बंद होने में जाना चाहते हैं उसे स्टार्ट होने में समय लगने लगा है, बिना वजह एरर का मैसेज रहा है तो इसका मतलब है की आपके कंप्यूटर की सेहत बिगड़ रही है और इसके इलाज की जरुरत है

कंप्यूटर की सेहत बिगड़ने के कई कारण हो सकते है इनमे एक कारण तो उम्र हो सकता है यानि पूरण होने की वजह से इसके कुछ उपकरण स्लो हो सकते है लेकिन यह भी हो सकता है की आपके द्वारा लगातार नए सॉफ्टवेयर इंस्टाल करने से भी इसकी सेहत बिगड़ जाय इसलिए आपको अपने पीसी की सेहत का ख्याल बिलकुल अपने शरीर की तरह करना चाहिए आपको सबसे पहले बचाव के उपाय करने चाहिए वैसे भी कहते हैं की इलाज से अच्छा बचाव होता है बचाव के बाद फर्स्ट एड की व्यवस्था समझनी चाहिए उसके बाद बड़े इलाज के बारे में जानना चाहिए कंप्यूटर का इलाज करने वाले हर आदमी को अपने पीसी को ठीक रखने के लिए बचाव के कुछ उपाय करने होते है और इन्टरनेट पर दुनिया भर के मुफ्त साफ्टवेयर उपलब्ध है जिसकी मदद से आप अपने कंप्यूटर को पूरी तरह से स्वथ्य रख सकते है

पीसी की सेहत ठीक रखने का पहला उपाय ही की इसमे हार्ड डिस्क को समय समय पर क्लीयर करते रहें शायद आपको अंदाजा नहीं हो की आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में क्या क्या कचरा इकट्ठा हो रहा है अगर आप सोचते हैं की इसमें सिर्फ आपके द्वारा सेव किये गए डिजिटल फोटोग्राफ्स , एमपी 3 के गाने या विडियो या कुछ टेक्स्टस फाईल्स सेव है तो आप गलत सोचते है जिनका आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते है जैसे आपको इसमें ऐसे ढेरों फईलानेम्स और एक्सटेंशन दिखेंगे जो आपको चौंका देगें ये उन प्रोग्राम के बचे हुए अंश होते है , जिन्हें ठीक ढंग से डिलीट नहीं किया गया होता है इनके अलावा इन्टरनेट की टेंपररी फाइल्स का जमावड़ा भी आपके हार्ड डिस्क में होता है साथ ही म्यूजिक या विडियो एडिटिंग के दौरान जो चींजे छुट गई होती है वो भी उसी में होती है ये सारी चीजें हार्ड डिस्क में ढेर सारी जगह घेरती है और इनकी वजह से आपका कंप्यूटर के स्पीड धीमी हो जाती है इसके लिए जरुरी है और की आप कंप्यूटर के हार्ड डिस्क को नियमित रूप से क्लीयर करते रहें वैसे यह कम बहुत आसान नहीं है की लेकिन अगर आप कंप्यूटर के टूल्स सी क्लीनर का इस्तेमाल करेंगे तो यह काम सुविधा से हो जायेगा सी क्लीनर का इस्तेमाल करने के लिए आपने कंप्यूटर के सी ड्राईव में जाकर Right click कर properties में जाये फिर Compress this drive to save disk space पर click करें फिर एक disk cleanup box खुलेगा जिसके बाद सभी पर टिक निशान लगाकर ok का बटन प्रेस करें उसके पश्चात् आपसे पूछा जायेगा की are you sure you want to permanently delete this files तो आप delete files पर click कर दें इस तरह से आपके कंप्यूटर के टेंपररी फिल्स हट जाएँगी

आपके कंप्यूटर की सेहत बिगाड़ने वाली एक चीज है साफ्टवेयर के अधिकता ज्यादातर उपयोगकर्ता बिना जरुरत समझे ढेर सारे साफ्टवेयर आपने सिस्टम में इंस्टाल करते जाते है इनकी वजह से कंप्यूटर की रफ़्तार धीमी हो जाती है इसकी वजह यह है की जब आप कोई साफ्टवेयर इंस्टाल करते है तो सिर्फ साफ्ट वेयर इंस्टाल नहीं होता है, बल्कि उसके साथ उसका पूरा डाटाबेस भी इंस्टाल हो जाता है, जिसका आकार बहुत बड़ा होता है ! इसलिए आपने पीसी में सिर्फ वही साफ्टवेयर इंस्टाल करें, जिनका आप नियमित रूप से इस्तेमाल करते है अगर आप बहुत सारे साफ्ट वेयरों का इस्तेमाल करना है तो पोर्टेबल एप्लीकेशन को आपनाएं |

Thursday, August 12, 2010



सेहत से खेलता है कंप्यूटर

यदि कंप्यूटर के आगे कायदे से नहीं बैठेंगे, यह चिंता नहीं करेंगे कि कंप्यूटर कहाँऔर कैसे रखा जा, स्क्रीन और आँखों के बीच किस प्रकार तालमेल हो तो गर्दनऔर पीठ में दर्द , हाथों और अँगुलियों और कलाई में दर्द, सिर में भारीपन औरआँखों पर असर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा |

आजकल करीब-करीब हर व्यक्ति कंप्यूटर उपयोग कर रहा है| चाहे काम छोटा हो या बड़ा , घर हो या दफ्तर हर जगह कंप्यूटर का उपयोग होता है | बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े सभी डेस्कटॉप के सामने बैठते हैं | बस, फर्क इतना है की कोई थोड़ी देर कंप्यूटर पर बैठता है तो किसी को घंटो रोजाना इस पर काम करना पड़ता है| सलिए इतना तो तय है कि कंप्यूटर का आपके स्वाथ्य के साथ कहीं कहीं गहरा रिश्ता जरुर होगा | कंप्यूटर ने जहाँ हमारे कार्यों को काफी आसान बना दिया है और दक्षता बढ़ा दी है वहीं हमारे शरीर पर एक प्रतिकूल असर भी छोड़ा है | कईयों को यह थोड़े समय के बाद साफ नजर भी आने लगता है | जैसे आँखों पर असर, गर्दन और पीठ में दर्द की शिकायत रहना, हाथों और उँगलियों और कलाई में दर्द सिर में भारीपन और दर्द की समस्या आदि ये सब कंप्यूटर की देन है | लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कंप्यूटर पर काम करना छोड़ दें|

दरअसल ये सब समस्याएँ किन्ही कारणों से ही होती है और ये वे कारण होते है जिन्हें हम एक कंप्यूटर उपयोगक्ता के रूप में नजरअंदाज करते चलते हैं | जैसे कंप्यूटर कहाँ और कैसे रखा हो, स्क्रीन और आँखों के बीच तालमेल किस प्रकार रखा जाय जिससे कि आँखों और गर्दन पर असर पड़े, कीबोर्ड की पोजीशन कैसे होनी चाहिए ताकि टाइप करते समय कलाई और उँगलियों में खिचाव नहीं आये|
यह एक तथ्य है कि 98 फीसदी लोग जन्म के समय आँखों से बिलकुल स्वस्थ होते है आप पाएंगे कि आँखों की मांसपेशियाँ सर्वाधिक आरामदायक स्थिति में उस समय होती है जब हम किसी दूर की वस्तु या आकाश की ओर देखते है इसी तरह इंसान का शरीर गतिशील के लिए बना है लेकिन जब हम लम्बे समय तक एक ही स्थिति या मुद्रा में बैठ रहें तो यह कष्टदायक हो सकता है ठीक यही बात कंप्यूटर पर काम करने वालों के साथ है| अगर आप बिना किसी आराम के लम्बे समय तक रोज स्क्रीन के सामने बैठते है तो यह आपके लिए कई तरह की बिमारियों को जन्म दे सकता है और थोड़ी सी भी लापरवाही गंभीर रूप धारण कर सकती है यह जो स्थिति होती है इसे कंप्यूटर फिटिंग सिंड्राम (सीपीएस) यानी कंप्यूटर से होने वाली थकान का लक्षण कहा जाता है | कंप्यूटर पर काम करने के दौरान आँखों के मांसपेशियों में जो खिचाव और दर्द होता है उसे कंप्यूटर विजन सिंड्राम कहा जाता है कंप्यूटर उपयोगक्ताओं को सबसे ज्यादा समस्या इसी की होती है | एक अध्ययन के मुताबिक करीब सात करोड़ लोग ऐसे है और इसमे से 90 फीसदी लोग किसी किसी रूप में सीवीएस से पीड़ित है | सीवीएस के जो प्रमुख लक्षण है उनमें आँखों में थकान सिरदर्द, धुंधलापन आना , आँखों में जलन, गर्दन और कंधे में दर्द जैसी शिकायत है होता यह है कि जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलक झपकने की दर कम हो जाती है और निगाहें सीधी स्क्रीन पर ही लगी रहती है यही वजह पहला कारण बनता है जिसमे आँखों में सूखेपन की शिकायत शुरू होती है फिर अगर आप इस पर गौर नहीं करते है और लम्बे समय तक कंप्यूटर पर बैठने का सिलसिला जारी रहता है तो सीधा असर साइट पर पड़ता है इसमे निकट दृष्टि दोष, दूर दृष्टि दोष दृष्टिवैषम्य आई फोकस का गड़बड़ा जाना जैसी बीमारियाँ हो जाती है |

कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते समय आँखों में जो समस्याएँ पैदा होती है | उनका एक कारण पलकों का कम झपकना भी है जब आप कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो उस समय पलकों का झपकते रहना बहुत जरुरी होता है पलक के झपकने से आँखों की सतह पर सूखापन नहीं आता है जब लोग कंप्यूटर पर काम कर रहे होते है तो सामान्य से पांच गुना कम पलक नहीं झपकते है जब आप बहुत देर तक पलक नहीं झपकते है तो आंसू जल्दी सुख जाते है और इसी से आँखों में सूखापन जाता है आमतौर पर दफ्तर में जो कमरे होते है उनमे सुखा वातावरण होता है उससे भी आँख में सूखापन और बड़ता है जब हम पड़ते है या सामान्य रूप से कोई काम करते है तो किताब मैगजीन आदी को अक्सर आपनी गोद में ही रखते है हमारी आँखों का ज्यादातर हिस्सा तो पलकों से ही ढका रहता है इसलिए आंसू जल्दी से सुखाते नहीं है कंप्यूटर पर देखने का मतलब होता है स्क्रीन पर लगातार और सीधे देखना आँखों की सतह जितनी ज्यादा एक्सपोज होती है आंसूं उतनी ही तेजी से सुखाते है और फिर इसी से आँखों में जलन सूखेपन खिचाव जैसी शिकायत होती है |

सबसे पहले बात करें कुर्सी की, जिस पर आप बैठ कर काम करते है उस कुर्सी की ऊंचाई इस प्रकार एडजस्ट की जानी चाहिए ताकि पैर सीधे जमीन पर टिक सके और गुतनों का कुलाहों से झुकाव बहुत ही मामूली हो अगर पैर जमीन पर नहीं टिकेंगे तो लटके लटके दर्द होने लगेगा कुर्सी पर पीछे की ओर कमर को पूरा टीकाएँ और कंधे कुर्सी के बैकरेस्ट से पुरी तरह मिलने चाहिए कुर्सी पर इस प्रकार बैठना चाहिए की अपर बैक और लोअरबैक का झुकाव कोण 90 से 115 डिग्री के बीच ही हो यदि जरुरी हो तो छोटा तकिया इस्तेमाल कर सकते है अगर कुर्सी आगे पीछे हो सकती है तो थोड़ी थोड़ी देर में स्थिति बदलते रहना चाहिए कुर्सी ऐसी हो जिसमे जरुरत पड़ने पर हत्थों को हटाया जा सके इससे आप हत्थों के बीच भी समायोजन कर सकते हैं |

आजकल जो कंप्यूटर फर्नीचर बनाये जा रहे है वे आपकी जरुरत के आलावा स्वास्थ्य संबंधी पहलुओं को भी ध्यान में रखकर बनाये जा रहे है कंप्यूटर टेबल से भी समस्याएँ पैदा होती है समस्याओं की तह में जाने से पहले आप खुद से कुछ सवाल पूछें जैसे आपका कंप्यूटर कितना ऊँचा है इसे देखने के लिए आपको निगाहें ऊपर करनी पड़ती है या मानिटर की सीध में आँख रखते है कुछ आपको सलाह देगें की मानिटर हल्का सा नीचे होना चाहिए लेकिन सच यह है की मानिटर को आप कैसे भी रखें इसका कोई बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, पर उसे देखने में कोई दिक्कत नहीं होने चाहिए आमतौर पर मानिटर भुजाओं की सीध में होना चाहिए |

बाजार में आपको कुछ टेबल ऐसी मिल जायेंगी जिनमें मानिटर जरा सा नीचे की और आता है इससे आपको यह लगने लगेगा की मानिटर उठ कर आपकी गोद में आ गया है | मानिटर को इस प्रकार रखा जाना चाहिए की यह आपके सीधा सामने पड़े | यह कीबोअर्द से ऊपर सीधे हाथ की ओर होना चाहिए ताकि गर्दन आरामदायक स्थिति में रहे | मानिटर का ऊपरी हिस्सा आँखों के लेबल से ज्यादा से ज्यादा दो इंच ही ऊपर हो | अगर कमरे में आसपास कोई खिड़की हो तो यह हमेशा ध्यान रखें की खेडकी ओर मानिटर के बिच 90 degree का कोण हो वरना खिड़की से रोशनी का छिलका मानिटर पर पड़ेगा |

काम करते समय फोन को मानिटर के आसपास उस जगह पर रखें जहाँ आपका हाथ आसानी से पहुँच सके ओर उसे उठाने के लिए आपको ज्यादा हिलना डुलना नहीं पड़े | जिस हाथ का उपयोग कम करते हों उस ओर फोन रखा जाना चाहिए | अगर आप हेंडसेट या स्पीकर फोन का उपयोग करें तो ज्यादा बेहतर होगा क्योंकिं इसमे गर्दन को हिलना भी नहीं पड़ेगा |


जब भी आप कोई कंप्यूटर टेबल खरीदें तो इतना जरुर ध्यान रखें की मानिटर रखने के आलावा उसमे सीडी , फ्लापी, कंप्यूटर स्टेशनरी आदि आसानी से राखी जा सके | मानिट
रकने के बाद बरी आती है कीबोर्ड रखने का बंदोबस्त क्या होगा | समस्या यह है की आजकल ज्यादातर निर्माता माल बचने के चक्कर में छोटी कीबोर्ड ट्रे बना देते है ओर ये ट्रे कीबोर्ड के लम्बाई से ज्यादा बड़ी नहीं होती | इससे सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है की माउस को अलग और ऊंचाई पर रकना पड़ता है ऐसे में लोग माउस को मानिटर के पास रख लेते है और फिर उस तक पहुँचाने के लिए उन्हें एक हाथ को बार बार आगे लाना पड़ता है | अगर माउस और कीबोर्ड एक लेबल में नहीं होंगे तो आपके लिए ही समस्या पैदा होगी | आप जिस हाथ से भी माउस का इस्तेमाल करते हों उसी हाथ की तरफ कीबोर्ड के आगे उसे रखें | माउस और कीबोर्ड की इस तरह की व्यवस्था से आप कंधे के दर्द के शिकार होने से बच जायेंगे |
अब बात आती है की टेबल की ऊंचाई क्या हो ? टेबल कंप्यूटर फर्नीचर का एक महातोपूर्ण हिस्सा होता है और इसकी ऊंचाई कुर्सी के ऊंचाई के अनुपात में होने चाहिए | इसलिए या हमेशा सुनिश्चित करें की जब भी आप कुर्सी पर बैठे तो मानिटर पर शीर्ष हिस्सा आपकी आँख के एकदम शिध में या उससे नीचे रहे ऐसा न हो की मानिटर देखने के लिए आपको सिर उठाकर आंखे ऊपर करनी पड़ रही है जब आपका हाथ कीबोर्ड पर पड़े तो कोहनी ९० डिग्री का कोण बनाये |

कंप्यूटर से होने वाली थकन से बचने का एक तरीका यह है कि आप उपयुक्त हार्डवेयरों का उपयोग करें | आजकल बाजार में तरह तरह के माउस मिल रहे हें बहुत छोटे भी और बहुत बड़े भी | ज्यादातर माउस अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ही बने होते है |

कंप्यूटर पर काम करते समय थकान नहीं हो इसके लिए जरुरी है कि २० मिनट काम करने के बाद एक दो मिनट का आराम ले लें | दफ्तर में खाली समय में कभी भी कंप्यूटर के सामने न बैठे | इससे अनावश्यक रूप से कंप्यूटर के सामने बैठने की आदत पड़ जाती है | लगातार कंप्यूटर की तरफ कभी नहीं देखना चाहिए काम के बीच बीच में आसपास निगाहें डालते रहना चाहिए | इससे आँख में जल्दी से थकन महसूस नहीं होगी और आँखों की दूसरी समस्याओं से भी आप काफी हद तक बच सकगें अगर आप अपने आँखों के डॉक्टर को दिखने जाते है तो उसे यह साफ-साफ बताएं के आप कंप्यूटर पर कितने घंटे लगातार बैठ रहे है
|
कंप्यूटर फर्नीचर बनाने वाली कंपनी अपना उत्पाद तैयार काने के लिए पहले आजकल काफी शोध करती है उसके बाद ही बे निर्माण का काम शुरू करती है इसमे ये कंपनी कई तरह के सर्वे करती है और फिर उसी से नतीजा निकलती है की बाजार में किस तरह की मांग है और किस तरह के आरामदायक फर्नीचर की लोगों को जरुरत है इसमे स्वास्थ्य के पहलू का विशेष रूप से ध्यान रखा जाता है कंप्यूटर टेबल और कुर्शी को एस प्रकार से डिज़ाइन किया जाता है कि व्यक्ति उसे आपनी जरुरत के हिसाब से एडजस्ट कर सके| कंपनी के ये हाइट एडजस्टेबल वर्क सेंटर इस अवधारणा पर आधारित है कि कंप्यूटर उपयोगकता को अपना स्वाथ्य बनाये रखने के लिए यह जरुरी है की वह स्थितियों में जल्दी-जल्दी परिवर्तन करता रहे है |

ज्यादातर कोम्पन्यों के आपने सेल्स विभाग होते है जो ग्राहकों के सीधे संपर्क में रहते है और उनकी जरुरत के बने में पूछते हुए अपने उत्पादों का सर्वे भी करते है | कुछ कोम्पन्यों ने इस काम के लिए कॉल सेंटरों की सेवाएं ले राखी है | भारत की प्रमुख फर्नीचर निर्माता कंपनी गोदरेज देश की पहली इसी कम्पनी है जिसने फर्नीचर तैयार करने के पहले स्वाथ्य संबंधी पहलुओं पर भी काफी शोध कराया है और ग्राहकों को एकदम आरामदायक फर्नीचर मुहैया करने की कोशिश की है |

मामला सिर्फ फर्नीचर तक ही सीमित नहीं है | हार्डवेयर निर्माता कंपनी भी इस बात पर काफी जोर दे रही है | की इसे उत्पाद बनाये जाएँ जो स्वास्थ्य की दृष्टी से पुरी तरह अनुकूल हों | माइक्रोसाफ्ट लाजितैक और सैमसंग ने इस दिशा में कदम उठाया है और इसे कीबोर्ड तैयार किये है | इसमे इस बात का खासतौर से ध्यान रखा गया है की उपयोक्ता इन पर काम के बाद अपने को थका हुआ महसूस नहीं कर, क्योंकि ज्यादातर शिकायतें यही सामने आती है कि कीबोर्ड पर थोड़ी देर काम करने के बाद कलाई और उँगलियों में थकन होने लगती है | इसलिए अब कंपनी कीबोर्ड को इस प्रकार डिज़ाइन कर रही है कि उन पर टाइपिंग कम थकने वाली हो, कुंजियाँ बहुत ही हल्की हो ताकि उँगलियों पर जोर नहीं पड़े | आजकल बाजार में इसे कीबोर्ड देखने को मिल रहे है जिन्हें झुकव्युक्त और एक ही बोर्ड पर कुंजियों के अलग-अलग खंड बने गए है ये हाथ कलाई और भुजाओं को ज्यादा आराम देने को ध्यान में रखकर तैयार किये गए है | माउस भी इसी तरह डिज़ाइन किये जा रहे है आजकल बाजार में आप्टिकल माउस के आलावा लेसर माउस और वायरलेस माउस भी मिल रहे है |

इस नए तरह के फर्नीचर बाजार में कंपनियों के लिए दाम एक बड़ी समस्या है क्योंकि इस तरह के फर्नीचर में छिपी हुयी लगत ज्यादा होती है |

इसा इसलिए होता है कि जो उत्पाद तैयार किया जाता है उसके बनाने में आपके स्वाथ्य संबंधी पक्ष पर भी काफी खर्च आता है यही कारण है कि इन फर्नीचरों के दाम आम फर्नीचरों से अलग होते है |





  • BHUPENDRA DEWANGAN
  • bhupendradewangan06@gmail.com